आयुर्वेद क्या है ?

आयुर्वेद

यही आयुर्वेद का सार है | यह चिकित्सा प्रणाली केवल रोगोपचार के नुस्खे ही उपलब्ध नहीं कराती बल्कि रोगों की रोकथाम के उपायों में भी विस्तार से चर्चा करती है | ‘आयुर्वेद’ दो शब्दों से मिलकर बना है | आयु अर्थात जीवन और वेद मतलब शास्त्र | अर्थात आयुर्वेद का मतलब शरीर, इन्द्रिय, मन और आत्मा के मेल हैं | सामान्य शब्दों में कहने का मतलब है कि जब तक मनुष्य के शरीर में इन्द्रियां काम करती रहती हैं, मन कार्य करता रहता है और आत्मा प्राणों को बचाये रखती है, तब तक मनुष्य जीवित है |

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में मृत्यु को छोडकर सभी प्रकार के रोगों की चिकित्सा संभव है | आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली अपने आप में पूर्ण है |

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति जड़ी बूटियों और वनौषधियों पर आधारित है | प्राचीन काल में ऋषि, महाऋषियों ने वर्षों तक गहरे जंगलों, पर्वतों पर रहकर वहां की वनऔषधियों पर वर्षों तक परीक्षण करके आयुर्वेद चिकित्सा का निर्माण किया तथा विभिन्न रोगों की उत्पत्ति और उनके निवारण के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों की गुणवत्ता का परिक्षण करने के बाद जनसाधारण को इसकी जानकारी प्रदान की |

आयुर्वेद का उद्देश्य स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी व्यक्तियों के रोगों को दूर कर उन्हें स्वस्थ बनाना |

आयुर्वेदिक चिकित्सा से व्यक्ति का शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार से सुधार होता है | आयुर्वेद में अधिकांश घटक जड़ी – बूटियों, पौधों फलों आदि से प्राप्त की जाती है | जिससे इसके कोई दुष्प्रभाव ( साइड – इफैक्ट) देखने को नहीं मिलते | अनेकों रोगों में आयुर्वेद विशेष रूप से प्रभावी है | आयुर्वेद भोजन तथा जीवन शैली में सरल परिवर्तन करके रोगों से दूर रखता है | आयुर्वेद केवल रोगों की चिकित्सा नहीं करता बल्कि रोगों से हमे दूर रखता है | आयुर्वेद चिकित्सा अपेक्षाकृत सस्ती होती है |

आयुर्वेदिक औषधियाँ स्वस्थ लोगों के लिए भी उपयोगी है |

ऐसे ही हम आज की बात करें तो हर घर बीमारियों की चपेट में है | लोगों का सारा पैसा दवाइयों में जा रहा है | फिर भी लोग अपने आपको स्वस्थ नहीं रख पा रहे हैं | क्योंकि लोग बिमारी होने का इन्तजार करते रहते हैं | सोचते हैं कि पहले बीमारी हो तो दवाई शुरू करें | लेकिन अगर हम अपनी दिनचर्या एवं खाने पीने में बदलाव करें और आयुर्वेद का इस्तेमाल करें तो हम और हमारा परिवार स्वस्थ रहेगा | हमें कोई बीमारी भी नहीं होगी और जटिल बिमारियों से बचा जा सकता है |

 

इसलिए हम आपके लिए लेकर आये हैं |

शंखनाद आयुर्वेद का शंखनाद रस जो बहुत वर्षों की खोज के बाद तैयार किया गया है | यह आपके परिवार के स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होगा | शंखनाद रस में आंवला , एलोवेरा , तुलसी , मुलहठी , गिलोय , दालचीनी आदि जड़ीबूटियों का शक्तिशाली मिश्रण है जिनके बारे में आप बखूबी जानते हैं | इसको आप अपने परिवार की दिनचर्या में शामिल कर परिवार को स्वस्थ और खुशहाल रख सकते हैं | क्योंकि आपका स्वस्थ शरीर ही आपके लिए सबसे ज्यादा अमूल्य है |

 

शंखनाद रस किन – किन बिमारियों पर रोक लगाता है |

1)       आंवला:- आंवला विटामिन C का बड़ा स्रोत है | इसको हर मर्ज की दवा माना जाता है | आंवला पाचन तंत्र से लेकर स्मरण शक्ति तक को दुरुस्त करता है , आंवलें के प्रयोग से शरीर की रोग – प्रतिरोधक क्षमता बढती है तथा खून साफ़ होता है जिससे बाल झड़ने की समस्या, बाल सफ़ेद होने की समस्या, दांतों में खून आना, पायरिया लगना, आँखों की रोशनी कम होना, मधुमेह, बवासीर, कब्ज, दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर , यौवन शक्ति, महिलाओं की सफ़ेद पानी की समस्या, चेहरे पर रौनक, मोटापा आदि समस्या दूर होती है | तथा स्ट्रेस से हमें बचाता है |

2)       एलोवेरा: - एलोवेरा एक चमत्कारी औषधि है | इसको ग्वारपाठा या धृतकुमारी के नाम से भी जान जाता है | औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है | यह खून की कमी को कम करके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाता है | शरीर में चुस्ती फुर्ती बनी रहती है | यह कब्ज, बवासीर, मधुमेह, गर्भाशय के रोग, त्वचा संबंधी रोग, चेहरे पर दाग धब्बे, जोड़ों के दर्द, आँखों के निचे काले घेरे आदि अनेक बिमारियों में रामबाण की तरह काम करता है | यह एक एंटीबायोटिक की तरह कम करता है |

3)       तुलसी: - तुलसी के गुणों के बारे में ज्यादा बताने की आवश्यकता नहीं है आप उसके गुण भली प्रकार से जानते है | तुलसी गले संबंधी बिमारी, त्वचा रोग, मुँह की दुर्गन्ध, कफ खांसी, अल्सर , कैंसर, पथरी आदि बीमारी के लिए संजीवनी का कार्य करती है |

4)       मुलहठी: - मुलहठी बहुत गुणकारी औषधि है | यह आमाश्य के विकार, गैस्टिक अल्सर, पेट के रोग, श्वास संबंधी रोग, वात एवं कफ रोग, आँतों की टी बी, स्त्रियों की रोग आदि की समस्याओं को दूर करके उन्हें स्वस्थ एवं निरोगी जीवन प्रदान करती है |

5)       गिलोय: - गिलोय एक ऐसी औषधि है जो हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढाती है | खून साफ़ करती है | डेंगू, मलेरिया, टाईफाईड, पीलिया, धातु विकार, लिवर एवं त्वचा संबंधी रोग, मधुमेह, टी. बी., हृदय रोग, रक्त चाप, कैंसर आदि से लाभकारी है | डेंगू की बिमारी में लोग इसकी बहुत खोज करते हैं |

6)       दालचीनी: - दालचीनी में औषधियाँ गुणों की भरमार है | यह मूत्र संबंधी बिमारी, त्वचा रोग, बवासीर, मुँह की बदबू, मोटापा, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल का लेवल, मानसिक तनाव, जोड़ों का दर्द, सर्दी जुकाम, आदि हज़ारों बीमारिया मिटाने के गुण है| यह यौवन शक्ति बढाने तथा वीर्य वर्धक है |

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